ज्योतिषियों के फेरे traps of astrolauser




*💫: प्रश्न: हस्तरेखा विज्ञान के संबंध में आपका क्या खयाल है❓❓❓*
*इन रेखाओं का क्या मतलब होता है❓❓❓* 💫

*💫इन रेखाओं का भविष्य से कोई संबंध नहीं है। हम तुम्हारे दोनों हाथ काट सकते हैं, फिर भी तुम्हारा भविष्य होगा। हम प्लास्टिक सर्जरी करके तुम्हारी पूरी चमड़ी बदल सकते हैं, फिर भी भविष्य होगा।*

*ये रेखाएं केवल तुम्हारे हाथ में मोड़ने के कारण बने हुए निशान हैं। लेकिन हम गैर जिम्मेदार होना चाहते हैं गहरे में हम नाचते हैं कि कोई हमारी जिम्मेदारी ले, कोई परमात्मा तुम्हारी जिम्मेदारी ले और तुम्हारी तकदीर लिखे।*

*भारत में तुम हाथ की रेखाएं पढ़ते हो लेकिन कभी तुमने पैर की रेखाएं पढ़ी हैं?*

*तुम उनकी उपेक्षा क्यों करते हो?*

*लेकिन इस पृथ्वी पर कुछ ऐसे आदिवासी भी हैं हो हाथ की रेखाएं नहीं पढ़ते, बल्कि पैर की रेखाएं पहुंचते हैं। और उससे वे सोचते हैं कि वे अंधेरे में अपना भविष्य टटोलने की कोशिश कर रहे हैं। और ये सिर्फ मूढ़ मान्यताएं हैं। और तुम इसे सब कहीं घटता हुआ देख सकते हो। कई तरह से तुम इसके उपाय करते हो।*

*हम कुंडली तैयार करते हैं, और उस कुंडली के अनुसार हम तय करते हैं कि कौन सा पुरुष उपयुक्त है किस स्त्री से शादी के लिए।*

*तुम्हारी सारी कुंडलियां गलत सिद्ध हुई है क्योंकि किसी का किसी से मेल होता दिखाई नहीं पड़ता।*

*मुझे आज तक ऐसा पति नहीं मिला जो पत्नी से खुश है। वह दूसरे की पत्नी के साथ खुश हो सकता है, लेकिन उन दूसरों की पत्नियों से उसकी कुंडली मेल नहीं खाती। मुझे ऐसी एक भी स्त्री नहीं दिखाई दी जो अपने स्वयं के पति से खुश हो। लेकिन बड़े बड़े ज्योतिषी पंडित हस्तरेखा शास्त्री, इन लोगों ने तय किया था।*

*मैं कुछ दिनों तक रायपुर में रहा। ठीक मेरे सामने ही एक ज्योतिष था, जो रायपुर में सर्वश्रेष्ठ था। उसकी फीस बहुत महंगी थी। और प्रतिदिन उसके पास लोगों की भीड़ आती जो अपने बेटों की, बेटियों की शादियों के बार में पूछती थी। एक दिन मैंने उससे कहा कि तुम बाकी लोगों के भविष्य तय करते हो, तुम्हारा अपने बार में क्या खयाल है? क्योंकि उसकी पत्नी उसे पीटती थी। उसने कहा, यह सब व्यवस्था है। मैं नहीं जानता कि इन रेखाओं का क्या अर्थ होता है। उनका कोई अर्थ ही नहीं होता। क्योंकि मैं अपने जीवन भर मेल करता रहा, कोई मेल नहीं होता।*

*लेकिन इस सो खेल के पीछे एक गहन प्यास है—कि अपनी जिम्मेदारी न लेनी पड़े। और जो आदमी अपनी जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार नहीं है, उसने आदमी होने से ही इनकार कर दिया। वह मनुष्य की गरिमा से नीचे गिर गया।*

*मैं रायपुर से कुछ दूर, बिलासपुर में था। एक ज्योतिषी मेरा हाथ रखने के लिए, मेरी कुंडली देखने के लिए बड़ा उत्सुक था। मैंने कहा, मेरे पास कोई कुंडली नहीं है लेकिन मेरे हाथ तुम देख सकते हो। लेकिन इससे पहले कि तुम मेरा हाथ देखो,अपना हाथ ठीक से देख लो। उसने पूछा, क्यों?*

*मैंने कहा, वह बाद में तय करेंगे। उसने काफी मेहनत की, अपने शास्त्रों मे देखा और फिर कई बातें कहीं।*

*मैंने कहा: धन्यवाद।*

*उसने पूछा,*

*मेरी फीस का क्या?*

*मैंने कहा, मैंने तुमसे पहले ही कहा था कि मेरा हाथ देखने से पहले अपना स्वयं का हाथ देखो—यह आदमी मेरी फीस देने वाला नहीं है। अगर तुम इतनी छोटी सी और इतनी जरूरी बात की भविष्यवाणी नहीं कर सकते, तो फिर बाकी सब अर्थहीन हो जाता है।*

*मनुष्य एक कोरे कागज की तरह पैदा होता है—एक साफ, अलिखित स्वतंत्रता। और यही उसकी गरिमा है।💫*

➡ *फिर अमरित की बूंद पड़ी, प्रवचन #05*




Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*