प्राणायाम से आपकी कितनी शारीरिक और मानसिक बीमारियाँ चुटकियों में खत्म हो जायेगी ……..




आश्चर्यजनक !!!! पर शत-प्रतिशत सत्य

बंधुओ,१५ सेकेण्ड आपके जीवन में तूफ़ान ला देंगे, आपकी काय पलट कर देंगे.
आज मैं आपको एक स्वानुभूत प्राणायाम सिखाता हूँ, जिसे करना भी बेहद आसान है और इस प्राणायाम से आपकी कितनी शारीरिक और मानसिक बीमारियाँ चुटकियों में खत्म हो जायेगी.

मैं जानता हूँ कि आपको सहसा विस्वास ही नहीं होगा. पर एक बार मुझपर विस्वास करके रोजाना १५ सेकेण्ड इसे करें और महीने भर बाद मुझे ढेर सारी दुआ अवश्य ही दीजियेगा क्योंकि आपकी यही दुआ मेरे पूरे जीवन का सार है, यही मेरी असली कमाई है. बाक़ी सारी तो यहीं रह जाना है.

१. जुकाम-खांसी से आज तक एक भी इंसान नहीं बच पाया होगा. अब भले ही अभी मुझे आप बड़बोला समझ लें, लेकिन यदि सारा देश १५ सेकेंडी ये प्राणायाम कर ले, तो मेरा चैलेन्ज है कि खांसी-जुकाम की दवा बननी बंद हो जायेगी.
ऐसा इसलिए कह रहा हूँ कि बरसों पहले मुझे खांसी-जुकाम इतनी ज्यादा होती थी कि महीनों खत्म नहीं होती थी, तब कुछ साल पहलेएक बार मैनें इस प्राणायाम का इजाद किया और अपने ऊपर अप्लाई किया
और आज बरसों से कोई खांसी-जुकाम नहीं. और कभीकभार शुरू हो भी जाती है तो इस प्राणायाम को दिन में कई बार रिपीट कर लेता हूँ और……………साफ़…………!!!!

इसके अलावा यदि आपको आँखों में किसी भी तरह की कोई परेशानी हो, ये प्राणायाम सीधा असर करेगा. अप देखिये कि मैं दिन में १० घंटे कंप्यूटर के सामने रहता हूँ या किताबें पढता हूँ. साठ साल का होने जा रहा हूँ, लेकिन पिछले १० सालों में मेरी आँखों का पावर बिलकुल नहीं बदला.

२. इस १५ सेकेंडी प्राणायाम से आपके कान की कोई भी बीमारी हो, असर करेगी. आपकी श्रवण शक्ति बढ़ाएगा.

३. और तीसरी सबसे महत्वपूर्ण, सबसे बड़ी बात……ये आपके दिमाग को ऊर्जावान बनाएगा, आपकी भूलने की बीमारी पर सकारात्मक असर करेगा, आपको ऊर्जावान बनाएगा, आपकी मानसिक शक्ति बढ़ाएगा, आपको एक असीम शान्ति का अहसास होगा.
तो फिर आखिर और क्या चाहिए आपको? 

बंधुओं, मेरे पास खर्राटों से परेशान कई लोग आते हैं, उन्होंने मेरा नुस्खा आजमाया और खर्राटे धीरे धीरे पूरी तरह से बंद तो नहीं, लेकिन काफी कुछ कंट्रोल में आ गया.

तो चलिए, सबसे पहले ये समझते हैं कि आखिर जुकाम-खांसी होती ही क्यूं है?
आपनें टोंसिल नाम की ग्रंथि तो सुनी ही होगी. ये ग्रंथि कफ़ पैदा करती है. कफ का काम है हमारी श्वसन क्रिया को लुब्रिकेट (जैसे कि मोबिल आयल) द्वारा तरल बनाए रखना और नासिका द्वारा विजातीय पदार्थों को सोखकर बाहर निकाल देना.

आज तक एक भी एलोपैथी दवा नहीं बन सकी, जो जुकाम-खांसी के लिए पूरी तरह से कारगर हो.
क्योंकि जुकाम-खांसी का कोई एक कारण नहीं, ढेरों कारण है. जैसे कि ठण्ड लगना, ज्यादा गरमी लगना, सर्द-गर्म होना, अचानक से टेम्प्रेचर में बड़ा अंतर आ जाना, बुखार, या फिर वायु कणों से हुई एलर्जी. इसके अलावा यह अनुवांशिक भी हो सकता है.

खैर, कारण जो भी हो, पर इन सब का असर ये होता है कि टोंसिल में सूजन आ जाती है और अधिक मात्रा में कफ का स्त्राव करने लगता है. और इसके असर से जुकाम-खांसी होने लगती है. आपनें देखा होगा कि पहले जुकाम शुरू होती है, जो धीरे-धीरे खांसी में कन्वर्ट हो जाती है.

जिनका रेजिस्टेंस पावर स्ट्रांग होता है, वे इसे आसानी से एडजस्ट कर लेते हैं.
तो अब जरा समझिये कि यदि टोंसिल की इस सूजन को दबा दिया जाए, तो टोंसिल धीरे-धीरे कफ जेनरेट करना कम कर देगी और जुकाम-खांसी कम होने लगेगी.
बंधुओं,

मेरा ये प्राणायाम वायु प्रेसर द्वारा इसी टोंसिल पर दबाव बनाता है, उसे पेनेट्रेट करता है और उसकी सूजन को कम करने लगता है.

तो चलिए, अब मैं आपको पूरी प्रक्रिया समझाता हूँ
अपनी आँखें बंद कर लें, फिर स्वांस पूरी तरह से अन्दर भर लें. स्वांस सीने को ही फुलाएं, पेट को नहीं. इस तरह अपने सीने को उभार दें.

फिर अपनी नाक के अग्र भाग को अंगूठे और पहली अंगुली (अनामिका) से पूरी तरह बंद कर लें.
अब बंद नाक से ही अंदर भरी हवा को धीरे धीरे छोड़ने को हल्का प्रयास करें.
लेकिन आपनें अपनी नाक को तो दबा रखा है, तो स्वांस निकलेगी ही कैसे?

और जब स्वांस निकलेगी ही नहीं, तो अंदर ही अंदर फैलेगी, दबाव बनाएगी. आपकी आँखों पर प्रेशर पहुंचेगा. (इसीलिये पहले आँखें बंद करने को कहा था) मस्तिष्क में हवा फैलेगी, कान तक भी प्रेसर आएगा और फिर अंत में आपके टोंसिल में खाज सी आनी शुरू हो जायेगी. आपको इन सबका पूरा-पूरा अहसास होना चाहिए.

जब टोंसिल पर पूरा प्रेसर पड़ेगा, तो उसके दबाव से उसकी सूजन कम होनी शुरू हो जायेगी. (आपको खांसी का ठसका भी लग सकता है, इसलिए शुरुवात में ज्यादा जोर ना लगाएं. धीरे धीरे प्रेसर बढायें)
अब धीरे-धीरे रुकी हवा का प्रेसर इतना हो जाना चाहिए कि आपको लगने लगे कि हलकी सी हवा कान से निकले जा रही है. (ये जान लीजिये कि कान से हवा निकल ही नहीं सकती, लेकिन जब कान के तंतुओं पर प्रेसर पड़ेगा, तो आपको हवा बाहर निकलने का अहसास भर होगा) आँखों से भी आंसू निकल सकता है
धीरे धीरे जोर लगाते जाएँ बढाते जाएँ और फिर अंत में एक झटके से, झट से हाथ हटा लें और सारी हवा जोरदार आवाज के साथ बाहर निकल जायेगी.

अब आपको एक असीम सकून का अहसास सा होगा, मस्तिष्क में हल्कापन छाने लगेगा. आपको बेहद आराम सा महसूस होगा.
इसी प्रक्रिया को ५ से दस बार दोहरायें.
बस आप देखिएगा कि आश्चर्यजनक रूप से आपका टोंसिल की सूजन कम होने लगी है.
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ये प्राणायाम सुबह खाली पेट करें, फिर दिन में कई बार (भोजन के ३ घंटे के बाद) कभी भी कर सकते हैं. जब जुकाम-खांसी का दौर उठा हो, कई बार करें, फिर धीरे-धीरे जब ठीक होने लगे, कम करते जाएँ.
जब पूरी तरह से ठीक हो जाएं, तो सिर्फ सुबह ही ५-१० बार रोजाना कर लिया करें.
जब आप अभ्यस्त हो जायेंगे, तो आपको ये पूरी प्रक्रिया बेहद आसान लगने लगेगी.
और फिर देखिएगा, इसके आश्चर्यजनक परिणाम.
आपको सहसा विश्वास ही नहीं होगा कि इतनी सामान्य सी प्रक्रिया कैसे आपके जीवन में एक क्रान्ति घटित कर जायेगी. आप स्वयं को बेहद हल्का, उल्लासमय, तरोताजा पाएंगे, आपकी उम्र बढ़ जायेगी और आप पूरे आनंद से अपना बाक़ी की जिन्दगी जी पायेंगे.

आप अपना अनुभव दूसरों को भी बाँटें और समाज को लाभान्वित करने में मेरे साथ सहयोग करें. मेरे साथ आप भी इस पुनीत कार्य में सहभागी बनिएगा. कृपया मेरी दोनों पोस्ट्स को शेयर करें, ताकि हमारे देश ही नहीं, पूरी दुनियाँ से जुकाम-खांसी का सफाया हो जाए.

लेकिन हाँ, अंत में एक बार फिर, मुझे दुआ अवश्य दीजियेगा…………….

यही तो मेरी असली पूंजी होगी.
इसी शुभकामना के साथ,आपका अपना, कमल झँवर

कमल झँवर जी के फेसबुक वाल से ली गई पोस्ट 🙂




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