‘भगवान्’ का अर्थ जाग्रत इंसान ………….

* 2500 साल पहले ‘भगवान्’ का अर्थ जाग्रत इंसान ही होता था. जैसे कि ‘भगवान् बुद्ध’, ‘भगवान् महावीर’. * भगवान् नहीं बल्कि ईश्वर ‘पराप्रकृतिक’ अवधारणा है. * शब्दों/व्यक्तियों को हड़प Continue Reading →

जैसे ही प्रयास छूटता है, प्रसाद उपलब्ध होता है…………..

बुद्ध ने छह वर्ष तक बड़ी खोज की। शायद ही किसी मनुष्य ने इतनी त्वरा से खोज की हो। सब कुछ दांव पर लगा दिया। जो भी जिसने बताया उसे Continue Reading →

समाधि फलित हो तो तुम्हारे हाथ से छोड़ा हुआ पात्र भी ऊर्ध्वगामी हो जाएगा…………

बुद्ध के जीवन में एक उल्लेख है। बुद्ध को जिस रात संबोधि लगी, समाधि लगी, उस रात छः वर्ष तक अथक मेहनत करने के बाद उन्होंने सब मेहनत छोड़ दी Continue Reading →

ध्यान की विधि कैसे चुने ! – ओशो

हमेशा उस विधि से शुरू करें जो रुचिकर लगे। ध्यान को जबरदस्ती थोपना नहीं चाहिए। अगर जबरदस्ती ध्यान को थोपा गया तो शुरुआत ही गलत हो जाएगी। जबरदस्ती की गई Continue Reading →

ध्यान से स्वास्थ्य का क्या संबंध है ?

ध्यान से स्वास्थ्य का क्या संबंध है? बहुत संबंध है। क्योंकि बीमारी का बहुत बड़ा हिस्सा मन से मिलता है। गहरे में तो बीमारी का नब्बे प्रतिशत हिस्सा मन से Continue Reading →

मन एक बीमारी है ………..

मन एक बीमारी है – ओशो बीमार स्वस्थ हो सकता है, ध्यान रखें, बीमारी स्वस्थ नहीं हो सकती है। बीमार स्वस्थ हो सकता है, क्योंकि बीमार बीमारी नहीं है, उस Continue Reading →

बथुआ – एक बहुउपयोगी औषधि ……

साधारण सा बथुआ कितने काम का – How many work Simple Bathua बथुआ हरा शाक है जो नाइट्रोजन युक्त मिट्टी में फलता-फूलता है- हर घर में खाया जाने वाला आम Continue Reading →

पूछा है किसी नेः बुद्ध और महावीर, कृष्ण और जीसस, मुहम्मद, लाओत्से, रजनीश, मतलब सभी पुरुष ही! तो किसी स्त्री ने बुद्धत्व की खबर दुनिया तक क्यों नहीं पहुंचाई ?

पूछा है किसी नेः बुद्ध और महावीर, कृष्ण और जीसस, मुहम्मद, लाओत्से, रजनीश, मतलब सभी पुरुष ही! तो किसी स्त्री ने बुद्धत्व की खबर दुनिया तक क्यों नहीं पहुंचाई? क्या Continue Reading →

संस्कार – बंदरों के जिद के सामान है ……..

संस्कार – बंदरों की ज़िद्द एक बार कुछ scientists ने एक बड़ा ही interesting experiment किया.. उन्होंने 5 बंदरों को एक बड़े से पिंजरे में बंद कर दिया और बीचों Continue Reading →