ध्यान व्यक्ति को पुनर्जीवन देता है और ताजा कर देता है …..

आज पहले से कहीं अधिक ध्यान की जरूरत है! ध्यान की इतनी जरूरत है कि यह बात लगभग जिंदगी और मौत की हो गई है। अतीत में यह विलासिता थी; Continue Reading →

एड्स [ AIDS ] की बीमारी धार्मिक बीमारी है …….

एड्स की बीमारी धार्मिक बीमारी है। इसका जन्म मोनेस्टरीज में और उन स्थानों पर हुआ, जहां धार्मिक गुरु लोगों को समझा रहे थे ब्रह्मचर्य। ब्रह्मचर्य बिलकुल ही अस्वाभाविक है। सिर्फ Continue Reading →

प्राण-साधना — ताओ

“जब कोई अपनी प्राणवायु को अपनी ही एकाग्रता के द्वारा नमनीयता की चरम सीमा तक पहुंचा दे, तो वह व्यक्ति शिशुवत कोमल हो जाता है।’ पहला सूत्र है, श्वास को Continue Reading →

पूर्ण स्वीकृति की अवस्था उपचारक है, चिकित्सकीय गुण रखता है, एक चिकित्सा है।

यदि तुम खुद को प्रेम नहीं करते तुम कभी किसी दूसरे को भी प्रेम नहीं कर सकते। यदि तुम खुद के लिए दयालू नहीं हो तो तुम किसी दूसरे के Continue Reading →

तिल में जिन्क और कैल्सियम होता है जो अस्थि-सुषिरता ( osteoporosis ) से संभावना को कम करने में मदद करता है।

पृथ्वी का अमृत.. तिल का तेल… यदि इस पृथ्वी पर उपलब्ध सर्वोत्तम खाद्य पदार्थों की बात की जाए तो तिल के तेल का नाम अवश्य आएगा और यही सर्वोत्तम पदार्थ Continue Reading →

मौन ध्यान की ऊर्जा और सत्य का द्वार ……..

मौन ध्यान की ऊर्जा और सत्य का द्वार है। मौन से जहाँ मन की मौत हो जाती है वहीं मौन से मन की ‍शक्ति भी बढ़ती है। जिसे मोक्ष के Continue Reading →

यह सारा जगत सदपुरुषों से हमेशा भरा हुआ है………….

अगर सद की खोज हो, तो यह सारा जगत सदपुरुषों से हमेशा भरा हुआ है। ऐसे लोग हुए, जो महावीर को नहीं समझ सके। ऐसे लोग हुए, जिन्होंने क्राइस्ट को Continue Reading →

मेरा मन शान्त होता ही नहीं। मैं कैसे शान्त हो जाऊँ ?

“सम्राट वू की चिन्ता” ●●●●●●●●● बोधिधर्म के पास ऐसा हुआ था। सम्राट वू ने कहा था कि, “मैं बड़ा चिन्तित रहता हूँ, बड़ा परेशान रहता हूँ, मेरा मन शान्त होता Continue Reading →