सुसाइड की जरुरत नहीं, संन्यास लो !” – ओशो

“सुसाइड की जरुरत नहीं, संन्यास लो !” – ओशो एक शिष्य ने ओशो से कहा की वह जिंदगी से तंग आ कर आत्महत्या करना चाहता है, इस पर ओशो बोले Continue Reading →

आंख की इतनी ऊर्जा का व्यय कैंसर पैदा कर सकता है।

शरीर की थकन और कैंसर अमेरिका में नई खोजें कह रही हैं कि टेलीविजन कैंसर का मूल आधार बनता जा रहा है। क्योंकि टेलीविजन आंख को बुरी तरह थकाने वाला Continue Reading →

जब हम लेट जाते हैं तो शरीर ही नहीं लेटता – उसके साथ अहंकार भी लेट जाता है।

🔴शवासन की खूबी क्या है ? शवासन का अर्थ है पूर्ण समर्पित शरीर की दशा, जब आपने शरीर को बिलकुल छोड दिया। पूरा रिलेक्स छोड़ दिया। जैसे ही आप शरीर Continue Reading →

यदि तुम हंस सको तो तुम्हारी सारी उदासी, सारा विषाद, सारा डिप्रेशन गायब हो जाएगा

🌺🌻🌺 तुम परमात्मा हो 🌺🌻🌺 डिप्रेशन से ग्रस्त व्यक्ति एक बड़े डाक्टर के पास गया | डाक्टर ने उसकी जांच की और पाया कि उसे कुछ भी नहीं है | Continue Reading →

मन का स्वभाव क्या है ?

मन है विचार की प्रक्रिया। मन कोई यंत्र नहीं है। मन कोई वस्तु नहीं है। मन एक प्रवाह है। मन को अगर हम ठीक से समझें तो मन कहना ठीक Continue Reading →

पुनर्जन्‍म एक सच्‍चाई है – ओशो

प्रश्‍न(1)—कुछ धर्म पुनर्जन्‍म में विश्‍वास करते है और कुछ नहीं करते। आप अपने बारे में कैसे जान सकते है कि आपने भी जीवन जिया है और पुन: जीएंगे? ओशो—सिद्धांतों में Continue Reading →

रंगों का मनोविज्ञान – ओशो

वह तुम ब्लूशर का टेस्ट देखे? एक जर्मन विचारक है, जिसने लाखों लोगों पर रंगों का अध्ययन किया है। और अब तो यूरोप और अमेरिका में बहुत से अस्पताल भी Continue Reading →

ध्यान करने का मतलब है, एफर्ट, प्रयास—मन को बदलने का। और ध्यान में होने का मतलब है, मन को बदलने का प्रयास नहीं, चुपचाप अपने में सरक जाना।

एक मित्र ने पूछा है कि किया हुआ ध्यान करना और ध्यान में होना इसमें क्या फर्क है? — टू बी इन मेडिटेशन एंड टु डू मेडिटेशन( ध्यान करना और Continue Reading →

487 ईसा पूर्व वैशाख पूर्णिमा को बुद्ध निर्वाण हुआ। उसी वर्ष आषाढ़ में राजगृह के वैभार पर्वत की सप्‍तपर्णी गुहा में पांच सौ अर्हत एकत्र हुए और महास्‍थविर महाकाश्‍यप की अध्‍यक्षता में बुद्धवचनों का संगायन किया। यह प्रथम बौद्ध संगीति कहलाई।

बुद्धकालीन राजगृह में कभी एक वन और दो पर्वत हुआ करते थे। वन था वेणुवन। पर्वत थे वैभार और गृध्रकूट। राजगृह मगध महाजनपद की राजधानी था। बुद्धकालीन भारत के छह Continue Reading →